महापौर पुष्यमित्र भार्गव खुद मैदान में , 75 % लोगों ने प्लास्टिक छोड़ा
देश का सबसे स्वच्छ शहर बनने का खिताब केवल पुरस्कारों से नहीं मिलता, उसके पीछे होती है लगातार मेहनत, अनुशासन और जनता की भागीदारी और अब वही मॉडल शहर से निकलकर कस्बों तक पहुंच रहा है। देपालपुर में आज स्वच्छता का ऐसा अभियान चला कि वर्षों से जमा कचरे के पहाड़ ढहने लगे। 1500 टन लिगेसी वेस्ट हटाने के लिए खुद महापौर ने मोर्चा संभाल लिया।

देपालपुर में करीब 1500 टन पुराने लिगेसी वेस्ट को खत्म करने के लिए नगर निगम की विशेष टीम मैदान में उतरी। सुबह से महापौर पुष्यमित्र भार्गव खुद अधिकारियों, एमआईसी सदस्यों और स्वच्छ भारत मिशन टीम के साथ मौके पर पहुंचे। करीब 200 से अधिक सफाई मित्रों ने लगातार काम करते हुए कचरे को अलग-अलग छांटकर प्रोसेसिंग के लिए भेजना शुरू किया। कुछ दिन पहले तक जहां बदबू और गंदगी थी वहीं अब जमीन दिखाई देने लगी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्थानीय व्यापारियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने साफ कहा कि नगर निगम सीमित है, लेकिन शहर की असली ताकत नागरिक और व्यापारी हैं। गीला-सूखा कचरा अलग रखें और सिंगल यूज़ प्लास्टिक कम करें। व्यापारियों ने भी माना कि पहले गंदगी ज्यादा थी, अब सफाई दिख रही है। यहां पहले कचरा गाड़ी कभी-कभार आती थी, अब दिन में दो बार कलेक्शन हो रहा है। यहां सिर्फ दो महीने में बड़ा असर दिखा। अब 75 प्रतिशत लोगों ने प्लास्टिक छोड़ा और गीला-सूखा कचरा अलग करने की आदत डाल ली। सबसे चौंकाने वाला बदलाव ट्रेंचिंग ग्राउंड में दिखा। जहां कचरे का ढेर था, अब साफ जगह दिखाई दे रही है।
देपालपुर में दिखा "इंदौर मॉडल" का असर कचरे के ढेर होते जा रहे खत्म
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