इंदौर में ‘अमृत संचय अभियान’ की पहल, हर नागरिक प्रतिदिन एक लीटर पानी बचाने का लेगा संकल्प
जल संकट से निपटने के लिए प्रबुद्ध नागरिकों की बैठक में बनी सहमति, भूजल संरक्षण, वर्षाजल संचयन और जल के पुनः उपयोग पर रहेगा जोर
इंदौर। भविष्य में संभावित जल संकट की चुनौती को देखते हुए इंदौर में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में ‘इंदौर अमृत संचय अभियान’ की पहल की गई है। इस अभियान का उद्देश्य शहर के प्रत्येक नागरिक को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना, पानी की बर्बादी रोकना, भूजल का संरक्षण करना और वर्षाजल संचयन को बढ़ावा देना है।
इस संबंध में 18 अक्टूबर को आयोजित बैठक में जनक पलटा दीदी, डॉ. सुनील चतुर्वेदी, श्री सुरेश एम.जी., श्री संदीप खानवलकर, श्री अंबरीश केला, मुस्लिम समाज के प्रबुद्धजनों सहित अन्य जागरूक नागरिकों ने सहभागिता की। बैठक में इंदौर के सामने संभावित जल संकट, पानी की बढ़ती मांग और उपलब्ध जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित नागरिकों ने जल संरक्षण के उपायों को जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक स्तर पर लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पानी की आपूर्ति बढ़ाने के साथ मांग कम करना भी जरूरी
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि जल संकट का समाधान केवल पानी की आपूर्ति बढ़ाने से संभव नहीं है। इसके लिए घरेलू उपयोग में पानी की खपत कम करना, अनावश्यक बहाव रोकना, पाइपलाइन के रिसाव की मरम्मत करना और भूजल के अत्यधिक दोहन पर नियंत्रण आवश्यक है। अभियान के माध्यम से नागरिकों को दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
घरों से शुरू होगी जल संरक्षण की मुहिम
अभियान के तहत घरों में नलों पर एरेटर लगाने, पुश-टू-ऑन नलों का उपयोग बढ़ाने, छत की पानी की टंकियों में फ्लोट वाल्व या ऑटोमैटिक कट-ऑफ सिस्टम लगाने और पानी के रिसाव को तत्काल ठीक कराने जैसे उपायों को प्रोत्साहित किया जाएगा। कार की नियमित धुलाई में पानी की खपत कम करने तथा आवश्यकता के अनुसार ही पानी इस्तेमाल करने की अपील भी की जाएगी।
RO से निकलने वाले अपशिष्ट जल को अलग एकत्रित कर फर्श की सफाई और अन्य उपयुक्त कार्यों में उपयोग करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही, पीने के पानी की गुणवत्ता का आकलन केवल TDS के आधार पर नहीं करने और आवश्यकता के अनुसार अन्य गुणवत्ता मानकों की जांच कराने के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
स्कूलों, कॉलेजों और उद्योगों को जोड़ने की योजना
अभियान को व्यापक स्वरूप देने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, उद्योगों, बहुमंजिला इमारतों, कॉलोनियों और सामाजिक संस्थाओं में जल संरक्षण संबंधी पोस्टर, व्याख्यान तथा व्यावहारिक कार्यशालाएं आयोजित करने का सुझाव दिया गया। विद्यार्थियों को जल ऑडिट, वर्षाजल संचयन और पानी की दैनिक बचत जैसी गतिविधियों से जोड़ने पर भी सहमति बनी।
बहुमंजिला इमारतों में पानी की खपत, लीकेज और जल के पुनः उपयोग की संभावनाओं का आकलन करने के साथ विभिन्न वार्डों में प्लंबरों की सहायता से टपकते नलों, खराब फ्लश और पाइपलाइन के रिसाव को ठीक करने के लिए अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।
कुओं-बावड़ियों का संरक्षण और वर्षाजल संचयन प्राथमिकता
इंदौर के पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने का सुझाव दिया गया। इसके तहत विभिन्न मोहल्लों में कम-से-कम दो कुओं या बावड़ियों की पहचान कर उनके संरक्षण, सुरक्षित रखरखाव, जल गुणवत्ता परीक्षण और पुनर्भरण की संभावनाओं पर काम करने की अपील की गई।
छतों पर वर्षाजल संचयन प्रणालियों को बढ़ावा देने, उचित डिजाइन के अनुसार फिल्ट्रेशन की व्यवस्था करने और पक्षियों की बीट जैसे प्रदूषण के स्रोतों से जल को सुरक्षित रखने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। कुओं, बावड़ियों और अन्य जल स्रोतों की गुणवत्ता जांच के लिए प्रारंभिक परीक्षणों के साथ आवश्यकता पड़ने पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से पुष्टि कराने पर बल दिया गया।
इसके अतिरिक्त, स्थानीय जलवायु के अनुकूल देशी वृक्ष लगाने, जलग्रहण क्षेत्रों को संरक्षित करने, मिट्टी के कटाव को रोकने और वर्षाजल को जमीन में समाने देने वाले उपायों को प्रोत्साहित करने की बात कही गई।
धर्म और विज्ञान के माध्यम से जन-जागरूकता
अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों और अन्य सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं की सहभागिता लेने का सुझाव दिया गया। धार्मिक एवं सामाजिक मूल्यों के साथ वैज्ञानिक तथ्यों और व्यावहारिक उपायों को जोड़कर जल संरक्षण का संदेश प्रसारित किया जाएगा। विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों, विद्यार्थियों और जागरूक नागरिकों की भागीदारी से अभियान की गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
‘हर दिन एक लीटर पानी बचाएं’ का आह्वान
‘इंदौर अमृत संचय अभियान’ का प्रमुख संदेश है कि शहर का प्रत्येक नागरिक प्रतिदिन कम-से-कम एक लीटर पानी बचाने का संकल्प ले। नागरिकों को अपने अनुभव साझा करने और सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरों को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
बैठक में सामने आए सुझावों का व्यापक उद्देश्य पानी की मांग कम करना, उपलब्ध जल का पुनः उपयोग बढ़ाना, वर्षाजल का संचयन करना और भूजल संसाधनों पर दबाव कम करना है।
जल संरक्षण बने इंदौर की जीवनशैली
अभियान का संदेश स्पष्ट है कि जल संकट से निपटने के लिए केवल चर्चा पर्याप्त नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने घर, मोहल्ले, संस्थान और शहर में ठोस कदम उठाने होंगे। जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर ही इंदौर के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।
अभियान का संकल्प:
“हर दिन एक लीटर पानी बचाएं, हर बूंद का सम्मान करें और इंदौर का जल भविष्य सुरक्षित बनाएं।”
इंदौर अमृत संचय अभियान — जनभागीदारी, जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और सुरक्षित भविष्य की सामूहिक पहल।
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