"पात्रता परीक्षा के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन
पात्रता परीक्षा वापस लेने की मांग"
इंदौर में मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिक्षक एकत्रित हुए और सरकार द्वारा प्रस्तावित पात्रता परीक्षा का विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों ने प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए परीक्षा संबंधी आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की।
शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हजारों शिक्षक लंबे समय से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वर्षों का अनुभव अर्जित किया है। ऐसे में अब उन्हें पुनः पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना पूरी तरह अनुचित है। संघ का कहना है कि शिक्षकों की योग्यता का आकलन केवल परीक्षा के आधार पर नहीं किया जा सकता। वर्षों की सेवा, अनुभव और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए किए गए कार्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित नियम से प्रदेशभर के शिक्षकों में असुरक्षा और चिंता का माहौल बन गया है।
शिक्षक नेताओं ने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक इस परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है तो उसके खिलाफ सेवा संबंधी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। यही कारण है कि शिक्षकों में भारी असंतोष है और वे इस निर्णय को अपने रोजगार और सम्मान दोनों के लिए चुनौती मान रहे हैं। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने सरकार से मांग की कि पात्रता परीक्षा संबंधी आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए और लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव एवं सेवाओं का सम्मान किया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण का महत्वपूर्ण आधार हैं और उन्हें बार-बार परीक्षा के दबाव में डालना उचित नहीं है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षक संघ के पदाधिकारी और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से शिक्षकों की भावनाओं को समझने और पात्रता परीक्षा संबंधी निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
"शिक्षकों ने सरकार से पात्रता परीक्षा संबंधी आदेश वापस लेने और लंबे समय से कार्यरत
शिक्षकों के अनुभव व सेवाओं का सम्मान करने की मांग की है।"
इंदौर से ENCOUNTER NEWS MP
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